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श्री राम नाईक

माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश

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संक्षिप्त परिचय 

(01 अक्टूबर, 2016)

  1. भारत के आदरणीय राष्ट्रपति ने 14 जुलाई 2014 को श्री राम नाईक को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर मनोनीत करने के बाद श्री नाईक ने 22 जुलाई 2014 को लखनऊ में पद ग्रहण किया और 05 अगस्त 2014 को राजस्थान के राज्यपाल के नाते भी मनोनीत करने के बाद श्री राम नाईक ने संक्षिप्त समय हेतु 08 अगस्त 2014 से 03 सितम्बर 2014 तक राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभाला। साऊथ इंडियन एज्युकेशन सोसायटी, मुंबई की ओर से ‘राष्ट्रीय श्रेष्ठता पुरस्कार’ कांची कामकोटी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य जयेन्द्र सरस्वती स्वामीगल के हाथों श्री राम नाईक को मुंबई में दिनांक 13 दिसम्बर 2014 को प्रदान किया गया। इसके पूर्व इस पुरस्कार से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ० शंकर दयाल शर्मा और पूर्व राष्ट्रपति स्व० डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम जैसे महानुभावों को अलंकृत किया गया है।
  2. श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठित मंत्री परिषद में 13 अक्टूबर 1999 से 13 मई 2004 तक श्री राम नाईक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री रहे। 1963 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का गठन हुआ। तब से अब तक लगातार पांच वर्ष कार्यरत वे एकमेव पेट्रोलियम मंत्री हैं। इसके पूर्व 1998 की मंत्री परिषद में श्री नाईक ने रेल (स्वतंत्र प्रभार), गृह, योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन और संसदीय कार्य मंत्रालयों में राज्यमंत्री (13 मार्च 1998 से 13 अक्टूबर 1999) के रुप में कामकाज संभाला था। एक साथ इतने महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालना विशेष माना जाता है। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना से याने 1980 से राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे तथा भाजपा शासित राज्य सरकारों के मंत्रियों की कार्यक्षमता बढ़े और गुणवत्ता का संवर्धन हो इसलिए गठित ‘सुशासन प्रकोष्ठ’ के राष्ट्रीय संयोजक भी थे। 2014 का लोकसभा चुनाव न लड़ने की तथा भविष्य में पार्टी को अपने राजनैतिक अनुभव देने के लिए राजनीति में सक्रिय रहने की घोषणा श्री राम नाईक ने भारतीय जनसंघ के आचार-विचार के प्रेरणाश्रोत तथा एकात्म मानववाद के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जयंती के दिन याने 25 सितंबर 2013 को पत्रकार सम्मेलन में की। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके उत्तर मुंबई निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार श्री गोपाल शेट्टी महाराष्ट्र में सबसे अधिक मतों से 6,64,004 और सबसे अधिक मताधिक्य 4,46,582 से जीते। श्री नाईक श्री शेट्टी के चुनाव प्रमुख थे। 
  3. पेट्रोलियम मंत्री के रुप में श्री राम नाईक ने अक्टूबर 1999 में पदभार संभाला। उस समय 1 करोड़ 10 लाख ग्राहक घरेलू गैस की प्रतीक्षा-सूची में थे। इस घरेलू गैस की प्रतीक्षा-सूची को समाप्त करने के साथ-साथ कुल 3 करोड़ 50 लाख नये गैस कनेक्शन श्री नाईक ने अपने कार्यकाल में जारी करवाए। उसके पूर्व 40 वर्षों में कुल 3.37 करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए थे। माँगने पर नया सिलंडर मिलना प्रारंभ हुआ था। इस पृष्ठभूमि पर श्री नाईक की कार्यक्षमता उभर कर सामने आती है। साथ-साथ दुर्गम तथा पहाड़ी इलाकों की और महानगरों के झुग्गी झोपड़िओं में रहने वाले अल्प आय वाले लोगों को राहत देने के लिए 5 किलो के गैस सिलेंडर भी उनके कार्यकाल में ही जारी किए गये। उस समय 70 प्रतिशत कच्चा तेल (क्रूड ऑइल ) आयात किया जाता था। कच्चे तेल के आयात की इस निर्भरता को कम करने के लिए उन्होंने विविध योजनाएं बनाकर उन्हें कार्यरूप देना शुरु किया। उन योजनाओं में से एक महत्वपूर्ण निर्णय अर्थात इथेनॉल का पेट्रोल में 10 प्रतिशत मिश्रण करना है। कारगिल युद्ध में शहीद वीरों की पत्नियों/निकटस्थ रिश्तेदारों को तेल कंपनियों के माध्यम से 439 पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी की डीलरशिप देने की विशेष योजना भी उनके द्वारा ही मंजूर की गई। संसद भवन पर हुए हमले में शहीद कर्मचारियों के परिवारजनों को भी पेट्रोल पंप आवंटित किए। पेट्रोल-डीजल के वाहनों से प्रदूषण कम हो इसलिए दिल्ली और मुंबई में सीएनजी गैस देना प्रारंभ किया। इस समय मुंबई में दो लाख आटो रिक्शा, 58 हजार टैक्सी, दो लाख निजी मोटरकारें तथा 9,400 बस-ट्रक-टेम्पो सीएनजी पर चलते हैं। इसके अलावा रसोई के एलपीजी सिलंडर के बदले अधिक सुरक्षित, उपयोग के लिए आसान और तुलना में सस्ता पाइप गैस(पीएनजी) शुरु किया। मुंबई में इसका लाभ 8 लाख परिवारों को और 2,800 लघु-उद्योगों को मिल रहा है।
  4. मुंबईवालों की नजर में ‘उपनगरीय रेल यात्रियों के मित्र’ यह श्री राम नाईक की असली पहचान है। श्री नाईक ने 1964 में ‘गोरेगांव प्रवासी संघ’ की स्थापना कर उपनगरीय यात्रियों की समस्याओं को सुलझाने का कार्य प्रारंभ किया। बाद में रेल राज्यमंत्री के नाते विश्व के व्यस्ततम मुंबई उपनगरीय रेल के 76 लाख यात्रियों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए ‘मुंबई रेल विकास निगम’(एम.आर.व्ही.सी.) की स्थापना की। मुंबई के उपनगरी यात्रियों को राहत देने की दृष्टि से श्री राम नाईक ने अनेक विषयों की पहल की जैसे कि उपनगरी क्षेत्र का विरार से डहाणू तक विस्तार, 12 डिब्बों की गाड़ियां, संगणीकृत आरक्षण केन्द्र, बोरीवली-विरार चौहरीकरण, कुर्ला-कल्याण छः लाईनें, महिला विशेष गाड़ी आदि। संपूर्ण देश में रेल प्लेटफार्मों पर तथा यात्री गाड़ियों में सिगरेट तथा बीड़ी बेचने पर पाबंदी लगाने का ऐतिहासिक निर्णय भी श्री नाईक द्वारा किया गया। यात्रियों से सुझाव लेकर नई गाड़ियों का नामकरण करने की अनोखी लोकप्रिय पद्धति का प्रारंभ भी श्री राम नाईक ने ही किया। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल गाड़ियों में हुए बम विस्फोट से पीड़ित परिवारों को सहायता पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए। 16 अप्रैल 2013 से डहाणू-चर्चगेट लोकल सेवा प्रारंभ हुई, जिसके पीछे श्री नाईक के सफल प्रयास रहे हैं। इस निर्णय से पश्चिम रेलवे का उपनगरीय सेवा का क्षेत्र 60 किलोमीटर से 124 किलोमीटर हुआ।
  5. श्री राम नाईक ने महाराष्ट्र के उत्तर मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार जीतने का कीर्तिमान बनाया है, इसके पूर्व तीन बार वे महाराष्ट्र विधानसभा में बोरीवली से विधायक भी रहे हैं। वर्श 1999 में तेरहवीं लोकसभा चुनाव में उन्हें 5,17,941 मत प्राप्त हुए जो कि महाराष्ट्र के सभी जीतने वाले सांसदों में सर्वाधिक थे। मुंबई में सफलतापूर्वक लगातार आठ बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले श्री नाईक पहले लोक प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधि की जवाबदेही एवं पारदर्षिता की भी भूमिका में मतदाताओं को वे प्रतिवर्ष कार्यवृत्त प्रस्तुत करते रहे। राज्यपाल का दायित्व सम्भालने के बाद भी आपने कार्यवृत्त ‘राजभवन में राम नाईक’ वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 को प्रस्तुत किया। इस प्रकार का कार्यवृत्त प्रस्तुत करने वाले वे देश में पहले राज्यपाल हैं।
  6. श्री राम नाईक संसद की गरिमामय लोक लेखा समिति के 1995-96 में अध्यक्ष थे। लोकसभा में वे भाजपा के मुख्य सचेतक भी रहे। संसदीय रेलवे समन्वय समिति, प्रतिभूति घोटाला (शेअर घोटाला) के लिए संयुक्त जांच समिति, महिला सशक्तिकरण को बल प्रदान करने हेतु संसदीय समिति जैसी प्रमुख समितियों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लोकसभा की कार्यवाही को सुचारु चलाने के लिए लोकसभा की सभापति तालिका के भी वे सदस्य रहे हैं।
  7. श्री राम नाईक ने संसद में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ का गान प्रारंभ करवाया। उनके प्रयासों के फलस्वरुप ही अंग्रेजी में ‘बॉम्बे ’ और हिन्दी में ‘बंबई’ को उसके असली मराठी नाम ‘मुंबई’ में परिवर्तित करने में सफलता मिली। इसके बाद कई महानगरों के नाम बदल कर उनको स्थानीय नामों में परिवर्तित किया गया, जैसे मद्रास से चेन्नई, कलकत्ता से कोलकाता, बैंगलोर से बंगलुरू, त्रिवेन्द्रम से तिरुअनन्तपुरम आदि। संसद सदस्यों को निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधि की संकल्पना श्री नाईक की ही है। इस राशि को रुपए 1 करोड़ प्रति वर्ष से रुपए 2 करोड़ प्रतिवर्ष कराने का निर्णय भी योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री के नाते श्री नाईक ने लिया। अब यह राशि रुपए 5 करोड़ की गयी है। संसद सदस्य के नाते उन्होंने ‘स्तनपान को प्रोत्साहन और शिशु खाद्य के विज्ञापनों पर रोक’का ‘निजी विधेयक’ प्रस्तुत किया। तद्नुसार इस विधेयक को सरकार द्वारा स्वीकृति मिली और बाद में यह अधिनियम बना। ऐसी स्वीकृति प्राप्त होने वाला भारत के संसदीय इतिहास में यह पहला निजी विधेयक है।
  8. श्री नाईक का जन्म 16 अप्रैल 1934 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ। विद्यालयीन शिक्षा सांगली जिले के आटपाडी गांव में हुई। पुणे में बृहन् महाराष्ट्र वाणिज्य महाविद्यालय से 1954 में बी.काम. तथा मुंबई में किशनचंद चेलाराम महाविद्यालय से 1958 में एलएल.बी. की स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। श्री नाईक ने अपना व्यावसायिक जीवन ‘अकाउंटैंट जनरल’के कार्यालय में अपर श्रेणी लिपिक के नाते शुरु किया। बाद में उनकी उच्च पदों पर उन्नति हुई और 1969 तक निजी क्षेत्र में कंपनी सचिव तथा प्रबंध सलाहकार के नाते उन्होंने कार्य किया। श्री राम नाईक बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं।
  9. राजनैतिक स्तर पर उन्होंने भारतीय जनसंघ के स्थानीय कार्यकर्ता के रुप में मुंबई का उपनगर गोरेगांव में कार्य शुरु किया। 1969 में भारतीय जनसंघ के मुंबई क्षेत्र के संगठन मंत्री के नाते कार्य करने के लिए उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने लगातार आठ वर्षों तक संगठन का कार्य किया। वे भाजपा मुंबई विभाग के तीन बार अध्यक्ष भी रहे। राज्यपाल मनोनीत होने पर 15 जूलाई 2004 तक वे पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य तथा भाजपा के ‘सुशासन प्रकोष्ठ’के राष्ट्रीय संयोजक भी थे।
  10. तारापूर अणु ऊर्जा प्रकल्प 3 व 4 के कारण विस्थापित हुए पोफरण व अक्करपट्टी ग्रामवासियों के पुनर्वास के लिए 2004 से स्वयम् श्री राम नाईक मुंबई उच्च न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब इन विस्थापितों को न्याय मिल रहा है। इस संदर्भ में श्री नाईक ने ‘गाथा संघर्षाची’मराठी तथा 'Saga of Struggle' अंग्रेजी किताबें भी लिखी हैं। कुष्ठपीड़ित रुग्णों का सामाजिक सशक्तीकरण हो तथा उनके परिवारों का यथोचित पुनर्वास हो इस उद्देश्य से उनकी पहल पर 5 दिसंबर 2007 को राज्यसभा में याचिका प्रस्तुत की गयी। राज्यसभा की याचिका समिति ने अपनी रिपोर्ट 24 अक्तूबर 2008 को राज्यसभा को प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त 1987 में विख्यात समाजशास्त्रज्ञ कै. शरद्चंद्र गोखले द्वारा स्थापित इंटरनैशनल लेप्रसी युनियन, पुणे के आप 23 नवम्बर 2012 से अध्यक्ष भी रहे। राज्यपाल पद की घोषणा होने के बाद आपने अध्यक्ष पद का त्यागपत्र दिया। श्री राम नाईक ने अपने जीवन के संस्मरण भी लिखे जो लोकप्रिय मराठी दैनिक ‘सकाल’में प्रकाशित होते रहे। बाद में यह पुस्तक रूप ‘चरैवेति! चरैवेती!!’ (चलते रहो, चलते रहो) दिनांक 25 अप्रैल, 2016 को प्रकाशित हुआ। तत्पश्चात इसका अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती और उर्दू भाषा में अनुवाद हुआ है।
  11. श्री राम नाईक को 1994 में कैंसर की दुर्धर बीमारी हुई परंतु श्री नाईक ने उस रोग को भी मात दी, तत्पश्चात् इसे जीवन का बोनस समझ कर विगत 22 वर्षों में पहले जैसे उसी उत्साह और कार्यक्षमता से वे काम कर रहे हैं। श्री राम नाईक एक विशिष्ट छवि वाले व्यक्ति हैं जो प्रत्येक कार्य में सूक्ष्मता और पारदर्शिता एवं जागरुकता के लिए जाने जाते हैं। 82 वर्ष की आयु में वह कठोर परिश्रम एवं सहर्षता के साथ कार्य में व्यस्त रहते हैं।